इंद्रधनुष

एक टुकड़ा इंद्रधनुष मेरा भी  🌈
रंग गया जो सांझ को, तेरा भी मेरा भी
बिखर गया दिवाकर मिल कर जिसे
वो ओस का कतरा, तेरा भी, मेरा भी

सोनाली मोहन

शिव स्तुति

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हे शिव शम्भू 🙏
तू आदि, तू ही अनंत है
तू आरम्भ, तू ही अंत है
तू ही बाँधे, तू ही करता स्वतंत्र है
तू ममत्व की छाँव, तू ही पितृ रूपी धुप है
तू ही सखा सा संग में, तू ही बंधू रूप है
तुझसे मंगल हैं सभी, तू ही प्रनय अभिराम है

हे शिव शम्भू, दया निधे
तू ही अजन्मा, जन्मा भी तू है
तू ही निरंकार, साकार भी तू है
कोई शब्दों में किस विधि कहे
कल्पनातीत, कालातीत भी तू, महाकाल भी तू है

हे नीलकंठ, हर प्राण संग नमन तुझको
हे इष्ट शतकोटि प्रणाम है 🙏 🙏 🙏

सोनाली मोहन

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वक़्त का तकाज़ा …

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चिरागों में रोशनी अभी बाकि है
अभी अँधेरा न होगा
जल रहे हैं उमीदों के कंडील अभ भी
दिवाली न सही, पर दिवाला न होगा
ऐसा वक़्त पहले गुज़रा तो नहीं है
पर ऐसा भी नहीं है, के गुज़ारा न होगा
मुश्किलें ज़रूर हैं, के बंध गए हैं
पर शायद ये, बंधन भी ज़रूरी होगा
कभी सोचा नहीं था
हाथ बढ़ा के उठा लेते थे जिन्हें
उन्हीं चीज़ों के लिए, दिनों का इंतज़ार होगा
दो कदम की दूरियाँ भी तै न होंगी
और जो दूर है
उससे ज़रा भी फासला न होगा …

सोनाली मोहन

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दिल बग़ावत कर रहा है

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दिल बग़ावत कर रहा है
बहुतों के ख़िलाफ़, गवाही दे रहा है
कटघरे में खड़ा कर, अपने हर मुल्ज़िम पर
मुक़दमा कर रहा है
दिल बग़ावत कर रहा है

चुप खड़े सुन रहे हैं, जवाब हो तो दें
जिसे मासूम समझ रहे थे
वही इल्ज़ामों की बौछार कर रहा है
दिल बग़ावत कर रहा है

फैसले के लिए, वक़्त को बुला लिया है
मेरी सुनेगा मुझे यकीन है
मैंने हमेशा वक़्त पे साथ दिया है
दिल बग़ावत कर रहा है

देख कर, कई परतों में छुपे
छल प्रपांच के गुनि गणो से
मेरी हिफाज़त का दावा कर रहा है
दिल बग़ावत कर रहा है …

सोनाली मोहन

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युगल गीत

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F तुम जो कह दो तो, बात समझें
चुप हो जो तुम, हम हैं उलझे
M क्या हो रहा है, कैसे कह दें
समझो न तुम, हम जो न समझे

F हम जो बह रहे हैं, तूफ़ान लेकर
साथ हो तुम तो, आसान हो सफर
M तुमसे जुड़ रहे हैं, कैसे ये सपने
जैसे तुम्ही मैं, हम आ बसे हैं
जाने क्या है ये, कैसे समझें
समझो न तुम, हम जो न समझे

F आँखों से तुम जो, सब कह रहे हो
लव्ज़ों को ढूँढो, और हमसे कह दो
M ढूँढ रहा हूँ, कब से खुदी को
तुम में ही पाया, अब तुम ही खोजो
लो मिल गया मैँ, तुम में देखो
समझो न तुम, अब तुम ही समझो

सोनाली मोहन

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Thought: Beloveds in conversation

दिल है, या तू है

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ये क्या धड़कता है, तेरे ख्याल से मुझ में
ये दिल है, या तू है, जो बैठा है मुझ में
क़ाबिले ग़ौर है, नज़र अंदाज़ करूँ कैसे
सर से पाऊँ तक, तो दिल नहीं था मुझ में

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सोनाली मोहन

प्रभु

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प्रभु …
परीक्षा अब और नहीं, परिणाम चाहिए
मेरी तपस्या का मुझे, वरदान चाहिए
मेरे इष्ट हो, सर्वश्रेष्ठ हो
मुझे भक्त होने का मान चाहिए
जग छूटा जिन चरणों में
मुझे उन चरणों में स्थान चाहिए
न राम के रूप में सिया संघ रहे
न कृष्णा थे जब, राधिका के हुए
न मीरा के मोहन, होकर ही जिए
युगों युगों की प्रतीक्षा क्यों …
प्रेम सर्वोपरि है, इस में पराजय नहीं है
मीरा कहा था आपने
अब मीरा को अपना कृष्णा चाहिए …

सोनाली मोहन

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Thought : Desire of a divine soul …